New+ 147+ खामोशी शायरी | Khamoshi shayari

जिस इंसान का दिल टूटता है वह इंसान दिल टूटने के बाद खामोश हो जाता है। अगर आपकी जिंदगी में भी दर्द है, आप भी खामोश हो और ढूंढ रहे हो khamoshi shayari तो आपको इस लेख की यह खामोशी शायरी जरूर से पढ़नी चाहिए। जिंदगी में जब बुरा समय आता है तो इंसान पूरी तरह खामोश हो जाता है। आपको इस लेख की khamoshi shayari पढ़नी चाहिए और अपने WhatsApp Status में भी लगानी चाहिए।

इस लेख में हमने खामोशी पर Best khamoshi shayari, Khamoshi shayari on life, Khamoshi shayari on life In hindi, Meri khamoshi shayari आदि 147 से भी ज्यादा शायरियां लिखी है। हमे लगता है कि आपको इस लेख की यह खामोशी शायरी जरूर से पसंद आएगी। आप इस लेख की शायरी को पढ़े और खामोशी शायरी पढ़ने का आनंद ले।

Khamoshi shayari

Khamoshi shayari

मुझ को अपने जैसे ही पसंद हैं
खामोश। साधा। मंफरिद और तनहा।.

है ये खामोशी आख़िरी हरबा
अब ना माना तो हार जाऊँगा मैं.

तेरे खामोश होंठों पर मोहब्बत गुनगुनाती है
तू मेरी है, मैं तेरा हूँ बस आज भी मुझे ये आवाज़ आती है.

Khamoshi shayari

ख़ामोशी से जब तुम भर जाओगे
चीख लेना थोडा वरना मर जाओगे !!

सन्नाटा टूटने का समय आ गया है
अब हम खुद को बर्बाद करने आये हैं !!

कितनी खामोश उसकी मुस्कुराहट थी
शोर बस आँख की नमी में था.

Khamoshi shayari

तुम खामोश हो पर आज भी तुम्हारा ये दिल बोल रहा है
तुम्हारे खामोश होने का मेरे सामने हर राज ये खोल रहा है

तड़प रहे है हम तुमसे
एक अल्फाज के लिए
तोड़ दो खामोशी हमें
जिन्दा रखने के लिए !!

दरून-ए-रूह पड़ी है___ख़ामोशी खामोशी
मैं बोलता भी बहुत हूँ मगर निकलती नहीं.

Khamoshi shayari

चेहरा मेरा था, निगाहें उसकी
खामोशी में भी वो बातें उसकी.

खामोश लव्स दिल मौन है
भला इस दोगली दुनिया में अपना कौन है..!!

मेरी खामोशी भी पनाह मांगती है
बया कर सकू खुद को
एक ऐसा जहां मांगती है..!!

Khamoshi shayari

दी हुई जुबान और काम आया इंसान
यह दो चीजें कभी भूलना मत..!!

दिल टूटने के बाद हमे जिंदगी में एक बात अच्छी तरह समझ आ गई
खामोश रहना बोलने से कहीं
ज्यादा बेहतर होता है..!!

दिल को छलनी खुशी का नाश
करती है यह खामोशी तो सीधा
दिल पर वार करती है..!!

Khamoshi shayari

हाल नहीं समझ आ रहा है खुद अपना
मैं किसी और को क्या समझाऊं
कि मुझे क्या हुआ है..!!

खुशी है तेरे चेहरे पर और मेरे दिल में खामोशी भरी है
याद में तेरे मेरी यह आंखें हर हर समय पल रो पड़ी है..!!

हमारा चुप रहना भी किसी को खले
भगवान ने हमें इतना
किस्मत वाला नहीं बनाया..!!

Khamoshi shayari on life

Khamoshi shayari

सुबह की पहली पसंद
रात की आखिरी तलब है
जनाब इस खामोशी की बात ही अलग है..!!

खामोशी ही अच्छी है वरना कुछ बातें
बाहर आ जाए तो मजाक बन जाता है
इंसान का भी और बातों का..!!

लौटकर फिर उस मोड़ को देखा हमने टूटकर
कोई छूट गया था हमारा यहां
एक रोज हमसे रूठकर..!!

Khamoshi shayari

लफ्जों को समझने वाले
बहुत हैं जनाब मगर
हमें तलाश उसकी है
जो हमारी खामोशियों को पढ़ सके..!!

बचपन में सोचते थे की बड़े होकर
गरीबों की मदद करेंगे और जब बड़े हुए
तो खुद गरीब और बेरोजगार हो गए..!!

तुमसे बिछड़कर इस कदर टूटा हूं
कि अब किसी को भी
अपने दिल से जोड़ नहीं सकता..!!

Khamoshi shayari

तेरी झूठी मोहब्बत से अच्छा तो
किसी की सच्ची नफरत ही प्यारी है..!!

इस कदर अकेला पड़ गया हूं
जैसे गुनाहों का अवार्ड मुझे ही मिला हो..!!

कुछ तो है जो खाया जा रहा है
अंदर ही अंदर मुझको
यूं ही नहीं रो पड़ता हूं
जरा सी बात पर..!!

Khamoshi shayari

आप इस्तेमाल हो रहे हो या
पसंद किए जा रहे हो
इस बात का पता जरूर लगा देना..!!

हजारों मिलेंगे तुझे तेरे पास
पर उन हजारों में हम नहीं मिलेंगे..!!

काश ये मोहब्बत ना होती तो
आज सुकून में जिंदगी बिता रहे होते..!!

कुछ नहीं का मतलब बहुत कुछ होता है
बस कोई समझने वाले नहीं मिलते यार..!!

Khamoshi Shayari 2 Line

डिप्रेशन में रहकर खुश रहने का
दिखावा करना मजाक है क्या..!!

वक्त ने आखिर छीन ही लिया उसे मुझसे
हम वैसे नहीं रहे जैसे पहले थे..!!

किस्मत का तो नहीं कहूंगा जनाब
सबसे पहले तो उसने ही साथ नहीं दिया
वरना हम दोनों थे एक ही कास्ट के..!!

एक दिन तुझे भी एहसास होगा मेरी जान
कि वह अपना भी ना था लेकिन फिर भी
अपनों से ज्यादा खयाल रखता था..!!

दर्द वही देते हैं जो अपने होते हैं
पराए तो टक्कर लगने पे
भी सॉरी बोल देते है..!!

खामोश लव्स दिल मेरा मौन है
जो कभी जान हुआ करते थे
वह पूछते हैं तु मेरा लगता कौन है..!!

रिश्ता तब बोझ बन जाता है
का एक निभाता है
और दूसरा सिर्फ सताता है..!!

आबाद तो नहीं पर
यह दिल बर्बाद तो है
मैं कहता हूं
कोई बात नहीं पर बात तो है..!!

जमाना बड़ा जालिम है प्यारे
लोग शहद के नाम पर
जहर खिला देते है..!!

खामोशी से जो कह दो, वो बात सच्ची होती है,
अल्फ़ाज़ के लिबास में, अक्सर झूठी होती है।

दिल तो करता है खामोश ही रहूँ,
पर दर्द है कि फिर भी
बयां हो जाता है।

तेरी यादों में बीते ये दिन और रातें,
तेरे बिना सूनी लगती हैं सारी बातें।

तुमसे क्या मिला मेरा खुदा नाराज है
की मैं अब तेरे सिवा उसे
भी याद नहीं करता..!!

अजीब है मेरा अकेलापन न खुश हु
न उदास हूँ बस
अकेला हु और खामोश हूँ !!

खामोशी शायरी

आंखें बोलने लगी मेरी जुबान खामोश है
अपनों ने दिया धोखा इसलिए दिल बेहोश है.!

तेरे संग हर ख़ुशी बीनी है
होके मलंग तेरे साथ जिंदगी जीनी है..!!

क्यों प्यार किया तुझे ये सोचते रहते है
मोहब्बत की जुदाई में तेरी पल पल मरते है ।।

खामोश रहना मेरी कमजोरी नहीं, ताकत है,
क्योंकि जब बोलता हूँ तो तूफान लाता हूँ!

जब इंसान हर वक्त खामोश रहने लगता है
तब वह इंसान अपने
रिश्तों से हरा हुआ होता है..!!

जिस रात तुम्हारा किसी से
बात करने को जी न चाहें
उस रात तुम मुझे फोन
करना और खामोश रहना.

उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी
ख़मोशी से गुज़र जाऊँगा मैं भी !!

फारिग़ न जानिए मुझे मसरूफ-ए-जंग हूँ
उस चुप से जो कलाम से
आगे निकल गई.

कोई हमारी खामोशी का भी मस्तहिक़ नहीं होता
और हम उसे एहसासात के तर्जुमे सुना रहे होते हैं.

ठहरी है खामोशी ही अगर तर्ज-ए-गुफ़्तगू
खामोश रह के तुझ को पुकारा करेंगे हम.

कैसी है ये मोहब्बत कैसा ये प्यार है
एक तरफ है जिंदगी में ख़ामोशी एक
तरफ इंतज़ार है !!

प्यार में बहुत कुछ सहना पड़ता है
कभी-कभी खामोश रहना पड़ता है !!

चुप रहो तो पूछता है ख़ैर है
लो ख़मोशी भी शिकायत हो गई !!

आंखों से बात करना कोई उनसे सीखे
खामोश रहकर भी बातें करना उनसे सीखे !!

तेरे इश्क़ पर ढलते हैं
मेरे शाम के किस्से,
खामोशी से मांगी___ हुई दुआ हो तुम.

अजब हालत हमारी हो गई है
यह दुनिया अब तुम्हारी हो गई है.

सुखन मेरा उदासी है सर-ए-शाम
जो खामोशी पे तारी हो गई है.

मेरे दिल से पूछ
तेरे हुस्न में क्या रखा है
फूल से चेहरे में शोले को छुपा रखा है.

महफ़िल खामोश है आज
टूटे हुए लोग कहाँ हैं.

रुत्बा तो खामोशियों का होता है
अल्फाज़ तो बदल जाते हैं लोग देख कर.

मैंने कुछ पल खामोश रह कर देखा है
मेरा नाम तक भूल
गए मेरे साथ चलने वाले.

खामोशी शायरी 2 लाइन Love

मर्शद! मैं लड़ नहीं सका पर चीखता रहा
खामोश रह कर ज़ुल्म का हमसाया नहीं बना.

मेरा चुपचाप रहना यह मेरी खामोशी है
मुझ पर क्या-क्या बीती इस बात की निशानी है..!!

ज्यादा अच्छा होना भी गुनाह होता है
पता ही नहीं चलता कि
लोग कदर कर रहे हैं या इस्तेमाल..!!

यार सब जमा हुए रात की खामोशी में
कोई रो कर तो कोई
बाल बना कर आया.

रफ़्ता रफ़्ता अल्फाज़ गूँगे हो गए
और गहरी हो गईं खामोशियाँ.

बे मकसद महफ़िल से बेहतर तन्हाई
बे मतलब बातों से अच्छी खामोशी.

खामोशियाँ वही रही ता उम्र दरमियाँ,
बस वक़्त के सितम और हसीन होते गए..!!

खामोशी के नाख़ून से छिल जाया करते हैं
कोई फिर इन ज़ख्मों
पर आवाज़ें मिलते हैं.

शोर शराबा रहता था जिस आँगन में
आज वहाँ से बस खामोशी निकली है.

कहो क्या बात करती है कभी सहरा की खामोशी
कहा इस खामोशी में भी तो एक तक़रीर होती है.

ख़ामोश शहर की चीखती राते
सब चुप हैं पर, कहने
को है कई बातें !!

मेरी खामोशी पे थे जो ताना ज़न
शोर में अपने ही बहरे हो गए.

खामोशी में चाहे जितना बेगानापन हो
लेकिन एक आहट जानी पहचानी होती है.

खामोशी शायरी 2 लाइन

मेरी खामोशियों में लरज़ां है
मेरे नालों की गुमशुदा आवाज़.

अंदर ऐसा हबस था मैंने खोल दिया दरवाज़ा
जिसने दिल से जाना है वो खामोशी से जाए.

सुनती रही मैं सब के दुख खामोशी से
किस का दुख था मेरे जैसा भूल गई.

वो जिस ने अश्कों से हार नहीं मानी
किस खामोशी से दरिया में डूब गई.

ग़लत बातों को खामोशी से सुनना हामि भर लेना
बहुत हैं फायदे इस में
मगर अच्छा नहीं लगता.

जिंदगी खामोशी शायरी

कबर और कदर में कोई फर्क नहीं
दोनों मरने के बाद ही मिलती है..!!

ये भी हो सकता है वाज़, कि मेरी खामोशी
तेरी बरसों की इबादत से भी अफ़ज़ल निकले.

कोई ऐसा जो घबराए मेरी खामोशी से
किसी को समझ आए मेरे लहजे का दुख.

इतना दर्द तो मरने से भी न होगा
जितना दर्द तेरी खामोशी ने दिया है.

ख़ामोश शहर की चीखती रातें
सब चुप हैं पर, कहने
को है हजार बातें !!

मेरी खामोशी शायरी

ख़मोशी से मुसीबत
और भी संगीन होती है
तड़प ऐ दिल तड़पने से
ज़रा तस्कीन होती है !!

कितनी दिलकश है खामोशी उसकी
सारी बातें फिजूल हों जैसे.

उसने कुछ इस तरह से की बेवफाई
मेरे लबो को खामोशी ही रास आई !!

बहुत खामोश लोगों से
बहुत उलझा नहीं करते.

वो किताबों से अल्फाज़ों का जंगल उठा लाया है
सना है, आज मेरी खामोशी का तर्जुमा होगा.

दर्द इतना है कि रहने लगा हूँ खामोश
इस बात का मुझे नहीं है कोई अफ़सोस !!

आंखों से बात करना कोई उनसे सीखे
खामोश रहकर भी बातें करना उनसे सीखे !!

क्यों करते हो इतनी खामोश मोहब्बत हमसे
लोग कहते हैं इस बेचारے का कोई नहीं.

क्या देखेंगे हम जल्वा महबूब कि हमसे
देखी न गई देखने वाले की नज़र भी.

इक तेरी खामोशी मार देती है मुझे
बाकी सब अंदाज़ अच्छे हैं तेरी तस्वीर के.

बे वजह खामोश नहीं हूँ मैं
कुछ तो बर्दाश्त किया होगा मैंने.

वक्त ने आखिर छीन ही लिया उसे मुझसे,
हम वैसे नहीं रहे जैसे पहले थे।

अदब कीजिए हमारी खामोशी का
आप की मक्कारी को छुपाए फिरते हैं.

खामोशी से करीब आकर, बाँहों में भर लेना
मुहब्बत करने वालों का, अजब अंदाज़ होता है.

तुझ पर अल्फाज़ नहीं वारेंगे
अब तुझे खामोशी से मारेंगे.

वो मेरी खामोशी नहीं सुनता
मुझ से आवाज़ नहीं दी जाती.

दिल की खामोशी शायरी

खामोश ज़िंदगी जो बसर कर रहे हैं हम
गहरे समंदरों में सफर कर रहे हैं हम.

मैंने समंदर से सीखा है जीने का तरीका
चुपचाप से बहना, और अपनी लहर में रहना.

लोग शोर से उठ जाते हैं
मुझे तेरी खामोशी सोने नहीं देती.

कितनी लंबी खामोशी से गुज़रा हूँ
इन से कितना कुछ कहने की कोशिश की.

आलम-ए-तख़लीक़ के इस हैरत-कोदे में ए अदम!
जिसको जितनी आगही थी उस क़दर खामोश था.

बात कहे देते हैं नाज़ से इशारे अकसर
कितनी खामोश मोहब्बत की ज़बानें होती हैं.

ख़ामोश है गाँव तेरी
हिजरत के ही दिन से
पेड़ों पे परिंदे भी तेरे बाद न बोले.

महफ़िल खामोश है साहब।
कहाँ गए टूटे हुए लोग।.

कभी खामोशी की चीख़-ओ-पकार सुनना
तुम्हें सब्र की हक़ीकत पता चल जाएगी.

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